Antibiotics Side Effects : एंटीबायोटिक्स कई बार हमारी जान बचाने का काम करती हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका गलत या ज़्यादा इस्तेमाल आपकी आंतों में सो रहे खतरनाक बैक्टीरिया को जगा सकता है? हाल ही में JAMA Network में छपी एक नई रिसर्च ने इस बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। आइए, इस रिसर्च की अहम बातें जानते हैं ताकि आप रहें सावधान और सुरक्षित।
रिसर्च में क्या निकला सामने?इजराइल के Sheba Medical Center में हुए इस अध्ययन में 23,000 से ज़्यादा मरीजों और लगभग 33,000 अस्पताल रिकॉर्ड्स का गहन विश्लेषण किया गया। रिसर्च में पता चला कि जिन मरीजों की आंतों में Clostridioides difficile (C. difficile) नाम का बैक्टीरिया बिना किसी लक्षण के मौजूद था, उन्हें अस्पताल में रहते हुए गंभीर संक्रमण का खतरा ज़्यादा था। यानी जिन लोगों में यह बैक्टीरिया पहले से चुपके-चुपके मौजूद है, वे पहले से ही हाई-रिस्क की श्रेणी में आते हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों में यह बैक्टीरिया नहीं है, उनमें एंटीबायोटिक्स का लंबे समय तक या बार-बार इस्तेमाल करने से इस तरह के संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है।
कौन-सी दवाएं बन सकती हैं मुसीबत?रिसर्च के मुताबिक, कुछ खास एंटीबायोटिक्स हमारी आंतों में मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया को खत्म कर देती हैं, जिससे C. difficile को बढ़ने का मौका मिल जाता है। इन दवाओं में शामिल हैं:
- फ्लोरोक्विनोलोन
- क्लिंडामाइसिन
- थर्ड-जेनरेशन सेफालोस्पोरिन
- पेनिसिलिन-बेटा लैक्टमेस इनहिबिटर
- कार्बापेनेम्स
इन दवाओं का इस्तेमाल सावधानी से करना बेहद ज़रूरी है, वरना आंतों का बैलेंस बिगड़ सकता है।
किन लोगों को है ज़्यादा खतरा?कुछ लोग इस बैक्टीरिया के संक्रमण की चपेट में ज़्यादा आसानी से आ सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- बुजुर्ग मरीज, खासकर 60 साल से ज़्यादा उम्र वाले
- पुरानी बीमारियों (जैसे डायबिटीज़, कैंसर) से जूझ रहे लोग
- एसिड दबाने वाली दवाएं लेने वाले मरीज
- पहले C. difficile संक्रमण का सामना कर चुके लोग
अगर आप इनमें से किसी श्रेणी में आते हैं, तो सावधानी बरतना और भी ज़रूरी हो जाता है।
अस्पतालों में सतर्कता क्यों ज़रूरी?विशेषज्ञों का कहना है कि C. difficile के संक्रमण को कई बार साधारण दस्त या फूड पॉइजनिंग समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। समय पर टेस्टिंग न होने की वजह से इसकी असली वजह पकड़ में नहीं आती। यही कारण है कि अस्पतालों में साफ-सफाई और सावधानी बरतना बेहद ज़रूरी है। अगर शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लिया जाए, तो इस खतरनाक बैक्टीरिया को काबू में किया जा सकता है।
संक्रमण से बचने के आसान उपायइस बैक्टीरिया से बचने के लिए कुछ आसान लेकिन कारगर उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर करें।
- अगर आपको दस्त की शिकायत हो, तो तुरंत टेस्टिंग करवाएं।
- हाथों की सफाई और हाइजीन का खास ख्याल रखें।
- अस्पतालों में बार-बार छूई जाने वाली सतहों (जैसे दरवाज़े, बेड) को नियमित रूप से साफ करें।
- ज़रूरत पड़ने पर मरीज को आइसोलेशन में रखें।
- हेल्थकेयर स्टाफ को इस बारे में जागरूक और प्रशिक्षित करें।
- प्रोबायोटिक्स का इस्तेमाल करें, जो सस्ता और फायदेमंद विकल्प हो सकता है।
एंटीबायोटिक्स का सही और सीमित इस्तेमाल न सिर्फ आपको बल्कि आपके आसपास के लोगों को भी इस खतरनाक बैक्टीरिया से बचा सकता है। अगली बार जब आप एंटीबायोटिक्स लें, तो अपने डॉक्टर से इसकी ज़रूरत और जोखिम के बारे में ज़रूर बात करें। सतर्क रहें, स्वस्थ रहें!
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