कैमूर, 29 अगस्त . शिवहर Lok Sabha क्षेत्र से जनता दल (यूनाइटेड) की महिला सांसद लवली आनंद ने Friday को कैमूर में एनडीए के कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लिया. इस दौरान उन्होंने विपक्ष के कथित ‘वोट चोरी’ के आरोप को निराधार बताया.
जदयू सांसद लवली आनंद ने कहा, “2005 से पहले के बिहार की क्या स्थिति थी, 90 के दशक के बिहार को याद करके आज भी लोग सिहर जाते हैं. कुछ भी सुरक्षित नहीं था, न खेत-खलिहान और न इंसान. वोट चोरी का आरोप वही लोग कर रहे हैं, जिन्हें लग रहा है कि जनाधार खिसक गया है. विपक्ष का जनाधार न देश में है और न ही बिहार में हैं, क्योंकि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में देश और Chief Minister नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार आगे बढ़ा है.”
उन्होंने विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा, “जनता सब समझती है और उसे बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता. विपक्ष को लग रहा है कि उनका जनाधार खत्म हो गया है, इसलिए वे भ्रामक स्लोगन और वोट चोरी जैसे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर वोट चोरी होती, तो झारखंड, बंगाल और कर्नाटक में विपक्ष की जीत कैसे होती? वहां वे लोकतंत्र की जीत का दावा करते हैं, लेकिन जहां एनडीए मजबूत है, जैसे महाराष्ट्र, दिल्ली और Haryana, वहां वोट चोरी का आरोप लगाते हैं. जनता इनके दावों को समझ रही है.”
आनंद ने तेजस्वी यादव के बयान, 2025 नीतीश कुमार का अंतिम चुनाव होगा और उन्हें कोई Chief Minister नहीं बनाएगा, का करारा जवाब दिया. कहा, ” सीएम नीतीश के नेतृत्व में बिहार लगातार प्रगति कर रहा है. विपक्ष को किसने कहा कि नीतीश को Chief Minister नहीं बनाया जाएगा? हमने तो ऐसा कुछ सुना नहीं. 2025 में एनडीए बिहार में 225 सीटें जीतेगी और नीतीश जी के नेतृत्व में बिहार और आगे बढ़ेगा. विपक्ष को ऐसी बातों का आधार कहां से मिला?”
‘वोट अधिकार यात्रा’ के मंच से कथित तौर पर Prime Minister Narendra Modi और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणियों पर आनंद ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, “विपक्ष का काम विरोध करना है, लेकिन Prime Minister और उनकी मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना अक्षम्य है. यह न केवल शर्मनाक है, बल्कि विपक्ष इससे अपना ही नुकसान कर रहा है. ऐसी भाषा देश के Prime Minister के सम्मान को ठेस पहुंचाती है और यह कतई स्वीकार्य नहीं है.”
संघ प्रमुख मोहन भागवत के तकनीकी शिक्षा और भाषा नीति पर बयान का समर्थन करते हुए जेडीयू सांसद ने कहा, “अधिक से अधिक भाषाएं सीखना जरूरी है. संस्कृत संस्कार देती है, जबकि अंग्रेजी वैश्विक संवाद के लिए महत्वपूर्ण है. मैथिली को अष्टम सूची में शामिल किया गया है और अब भोजपुरी की मांग उठ रही है. मैं भी चाहती हूं कि अधिक भाषाएं सीखूं, क्योंकि यह ज्ञान और संस्कृति को समृद्ध करता है.”
दिल्ली के पूर्व Chief Minister अरविंद केजरीवाल के भाजपा-कांग्रेस साठगांठ के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “केजरीवाल को सोच-समझकर बोलना चाहिए. अगर साठगांठ है, तो फिर Prime Minister और उनकी मां को गाली क्यों दी जा रही है? वे अपने आरोपों का आधार स्पष्ट करें.”
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एससीएच/केआर
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